ईद मिलादुन्नबी के जलसे में गूंजा अमन-ओ-भाईचारे का पैगाम
*नायब शहर क़ाज़ी सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने कहा—अपनी ज़िंदगी से साबित करें कि आप अमन के पैगंबर के पैरोकार हैं*
देहरादून। ईद मिलादुन्नबी के मुबारक मौके पर देहरादून में आयोजित जलसे में अमन, भाईचारे, आपसी सौहार्द और इंसानियत का पैगाम दिया गया। नगर निगम सभागार में आयोजित जलसे को संबोधित करते हुए नायब शहर क़ाज़ी (अहले सुन्नत) एवं ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के प्रदेश अध्यक्ष पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने पूरी दुनिया को पैग़म्बरे अमन-ओ-शांति हज़रत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की विलादत की मुबारकबाद दी।
पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने कहा कि ईद मिलादुन्नबी केवल खुशी का अवसर ही नहीं, बल्कि पैग़म्बरे अमन की शिक्षाओं को अपनी ज़िंदगी में उतारने का भी मौका है। उन्होंने कहा कि जो लोग मिलाद का विरोध करते हैं और अमन के पैगंबर की पैदाइश की खुशी मनाने पर एतराज़ करते हैं, उन्हें इस अवसर की मूल भावना को समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत के एक संगठन के प्रमुख द्वारा मिलाद के संबंध में की गई टिप्पणी उनकी अज्ञानता का परिचायक है। यदि ऐसी टिप्पणी पूरी जानकारी और सोच-समझकर की गई है तो यह चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों से समाज में अनावश्यक विवाद पैदा होने की संभावना रहती है, जबकि देश को आज आपसी भाईचारे, शांति और एकता की अधिक आवश्यकता है।
पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने कहा कि मिलाद मनाने को लेकर बहस में उलझने के बजाय मुसलमानों को अपने आचरण और व्यवहार से पैगंबर-ए-अकरम ﷺ की शिक्षाओं को सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी धार्मिक कार्यक्रम शरीयत और देश के कानून के दायरे में रहकर आयोजित किए जाने चाहिए तथा किसी भी ऐसे गैर-शरई या अनुचित कार्य को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए जिससे समाज में परेशानी पैदा हो।
उन्होंने कहा कि जिस नबी की विलादत की खुशी मनाई जा रही है, वह तमाम आलम के लिए रहमत बनकर आए। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उसकी वजह से किसी दूसरे व्यक्ति को परेशानी न हो। उन्होंने लोगों से हर तरह की खुराफात, बेमकसद और बेहूदा गतिविधियों से बचने की अपील की।
नायब शहर क़ाज़ी ने मुसलमानों से कहा कि अपने अमल और किरदार से यह साबित करें कि वे अमन वाले रसूल के गुलाम हैं। उन्होंने कहा कि हमारे किसी भी कार्य की वजह से कोई व्यक्ति हमारे आक़ा की तरफ उंगली उठाने का अवसर न पाए, इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
गांधी ग्राम ग़ोसिया जामा मस्जिद के खतीब एवं इमाम मौलाना मो. आज़म ने अपने संबोधन में कहा कि हमें जिस नबी की पैदाइश की खुशी मनाने का अवसर मिला है, उनकी शिक्षाओं और पदचिह्नों पर चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया और आखिरत की कामयाबी इसी में है कि इंसान अपने जीवन को पैगंबर-ए-अकरम ﷺ की शिक्षाओं के अनुरूप ढाले।
इससे पहले ईद मिलादुन्नबी का जुलूस सुबह करीब आठ बजे गांधी ग्राम स्थित ग़ोसिया जामा मस्जिद से रवाना हुआ। जुलूस पटेल नगर पहुंचा, जहां श्री आज़ाद अली और नायब शहर क़ाज़ी पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने संयुक्त रूप से झंडा दिखाकर जुलूस को रवाना किया।
जुलूस सहारनपुर चौक, गऊघाट, रेलवे स्टेशन, प्रिंस चौक, कचहरी और दून अस्पताल होते हुए नगर निगम सभागार पहुंचा। इस दौरान लोगों ने नात-ए-पाक और धार्मिक नारों के माध्यम से ईद मिलादुन्नबी की खुशी का इज़हार किया।
नगर निगम सभागार में जलसे का आगाज़ कुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुआ। हाफिज शबाब, निसार शाह और हाफिज अर्श ने नात-ए-पाक पेश की, जिसे सुनकर मौजूद लोग भावविभोर हो गए।
प्रमुख लोगों को किया गया सम्मानित
कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर शाहवेज मलिक और प्रोफेसर रियाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने नायब शहर क़ाज़ी सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी, इम्तियाज अहमद, राशिद खान, मौलाना मो. आज़म और गुलफाम शेख को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के समापन पर सभी लोगों ने खड़े होकर नबी-ए-पाक ﷺ की बारगाह में दरूद-ओ-सलाम पेश किया। इसके बाद खाने और शीरनी पर फातिहा पढ़ी गई। नायब शहर क़ाज़ी पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने मुल्क में अमन, आपसी सौहार्द, भाईचारे और तरक्की के लिए दुआ कराई।
जलसे के समापन के बाद मौजूद लोगों को खाना, फल और पानी आदि वितरित किया गया।
जुलूस और जलसे में मुख्य रूप से शमीम खान, निसार शाह, अमजद अली, इम्तियाज अहमद, रियासत अली, मास्टर हशमत, अली अहमद रहमान सर सहित बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया।


