देहरादून

*आशारोड़ी-मियांवाला एलिवेटेड रोड के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू, 200 से ज्यादा भवनों पर मंडराया संकट*

आशारोड़ी-मियांवाला एलिवेटेड रोड के लिए भूमि अधिग्रहण शुरू, 200 से ज्यादा भवनों पर मंडराया संकट

 

 

*15 मोहल्लों की निजी संपत्तियां परियोजना की जद में आने की संभावना*

 

 

देहरादून। राजधानी देहरादून में आशारोड़ी से मियांवाला तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। परियोजना के लिए किए जा रहे सीमांकन के दौरान प्रभावित क्षेत्र में आने वाले भवनों पर लाल निशान लगाए जा रहे हैं। इससे स्थानीय निवासियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, परियोजना की जद में 15 मोहल्लों के 200 से अधिक भवन आने की संभावना है। इनमें कई भवन पूरी तरह, जबकि कुछ आंशिक रूप से प्रभावित हो सकते हैं।

 

करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना में लगभग एक हजार करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाने का प्रस्ताव है। हालांकि, सड़क निर्माण की इस योजना को लेकर जहां भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोगों का विरोध भी तेज होने लगा है। स्थानीय निवासियों ने अपने घरों पर लाल निशान लगाए जाने के बाद संघर्ष समिति का गठन कर परियोजना के लिए जारी भूमि अधिग्रहण के नोटिफिकेशन को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई है।

प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए सीमांकन की कार्रवाई के दौरान रिहायशी भवनों पर लाल निशान लगाए जाने से क्षेत्र में बेचैनी का माहौल है। जिन परिवारों की संपत्तियां सड़क परियोजना की जद में आने की आशंका है, वे अपने भविष्य और आशियाने को लेकर चिंतित हैं। लोगों का कहना है कि उनके मकान और अन्य निजी संपत्तियां वर्षों की मेहनत और जमा पूंजी से तैयार हुई हैं। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई से उनके सामने रहने और आजीविका से जुड़ी गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।

 

स्थानीय निवासी दिनेश चंद्र पंत, केशव प्रसाद अवस्थी, एसआर जायसवाल, गजेंद्र नेगी, सुशील कुमार और नयन सिंह ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित परियोजना के कारण हजारों परिवारों के सामने बेघर होने का खतरा पैदा हो गया है। प्रभावित लोगों ने मांग की है कि भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और संबंधित नोटिफिकेशन को रद्द किया जाए।

भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई तेज होने के साथ प्रभावित निवासियों ने एकजुट होकर संघर्ष समिति का गठन किया है। समिति के माध्यम से लोगों ने अपनी आपत्तियां सामने रखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों से इस मामले में पुनर्विचार करने की मांग की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि विकास कार्यों के साथ लोगों के आवास, निजी संपत्ति और आजीविका से जुड़े हितों का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

प्रभावित लोगों की प्रमुख मांग है कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले स्थानीय निवासियों की समस्याओं और आपत्तियों पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में मकान और दुकानें प्रभावित होती हैं तो इसका असर केवल भवन मालिकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन परिवारों और कारोबारियों पर भी पड़ेगा जिनकी आजीविका इन संपत्तियों से जुड़ी हुई है।

प्रस्तावित योजना के तहत अजबपुर से मियांवाला तक लगभग पांच किलोमीटर लंबे हिस्से में नई सड़क बनाई जानी है। इस हिस्से के लिए करीब 23 मीटर भूमि अधिग्रहित किए जाने की जानकारी दी गई है। संबंधित क्षेत्र में अधिकांश जमीन निजी स्वामित्व वाली बताई जा रही है। इसमें खाली प्लॉटों के साथ रिहायशी मकान और दुकानें भी शामिल हैं। इसके अलावा कुछ भूमि रेलवे और राज्य सरकार की भी है।

 

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना के निर्माण से जुड़ी आगे की कार्रवाई की जानी है। हालांकि, निजी संपत्तियों की बड़ी संख्या इस योजना को स्थानीय स्तर पर संवेदनशील बना रही है। सीमांकन और भवनों पर लाल निशान लगाने की कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि उनकी संपत्तियों का कितना हिस्सा अधिग्रहण की जद में आएगा।

प्रस्तावित परियोजना के लिए देहराखास, सेवला खुर्द, बद्रीपुर, ब्राह्मणवाला, माजरा, माजरीमाफी, मोहब्बेवाला, मोहकमपुर खुर्द, शाहनगर, कारगी ग्रांट, अजबपुर कलां, अजबपुर खुर्द, चक अजबपुर खुर्द, चकशाहनगर और तालुक देहरादून सहित विभिन्न क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण किया जाना है।

इन क्षेत्रों में निजी संपत्तियों के प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है। प्रभावित निवासियों की चिंता है कि परियोजना के दायरे में आने वाले मकानों और दुकानों के कारण कई परिवारों को अपने मौजूदा ठिकाने छोड़ने पड़ सकते हैं। हालांकि, वास्तविक रूप से कितने भवन पूरी तरह और कितने आंशिक रूप से प्रभावित होंगे, इसकी स्थिति संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगी।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के परियोजना निदेशक सौरभ सिंह के अनुसार, आशारोड़ी से मियांवाला तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फिलहाल सीमांकन का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग दो हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्र सरकार को भेजी गई है।

 

परियोजना निदेशक के मुताबिक, कुल प्रस्तावित लागत में करीब एक हजार करोड़ रुपये भूमि अधिग्रहण पर खर्च किए जाने हैं। इससे स्पष्ट है कि परियोजना में भूमि अधिग्रहण एक बड़ा हिस्सा है और आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित जमीन का निर्धारण महत्वपूर्ण होगा।

आशारोड़ी से मियांवाला तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड को लेकर भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू होने के साथ ही विकास योजना और स्थानीय निवासियों की चिंताओं के बीच टकराव की स्थिति उभरने लगी है। एक ओर परियोजना की डीपीआर केंद्र सरकार को भेजी जा चुकी है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित लोग अपने मकानों और दुकानों को लेकर आशंकित हैं।

 

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण होगा कि भूमि अधिग्रहण की जद में आने वाली संपत्तियों की स्थिति स्पष्ट हो, प्रभावित लोगों की आपत्तियों को सुना जाए और नियमानुसार मुआवजे तथा पुनर्वास से जुड़े प्रावधानों की जानकारी संबंधित परिवारों तक पहुंचाई जाए। फिलहाल संघर्ष समिति की ओर से नोटिफिकेशन रद्द करने की मांग उठाए जाने के बाद इस परियोजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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