इस घर में बड़े लोगों का रिश्ता नहीं आता
शिब्ली रामपुरी
ऐसे बहुत लोग होते हैं कि जो गरीब हैं या फिर जिन्होंने अपनी तमाम जिंदगी की कमाई अपनी बेटियों को पढ़ाने पर खर्च कर दी और शादी के लिए उनके पास अब उतना पैसा नहीं है कि वह अपनी बेटी की शादी में महंगा सामान दे सकें. क्योंकि आज के वक्त की ये एक कड़वी सच्चाई है कि तमाम कोशिशो के बावजूद भी दहेज ने जिस तरह से अपने पांव पसारे हैं उसने बहुत कुछ चीजों को अपनी चपेट में ले लिया है और इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह आई है कि इसकी चपेट में वह लोग सबसे अधिक आए हैं कि जो गरीब हैं.
दरअसल एक तरफ दहेज की बात है समस्या है तो दूसरी ओर ऐसे लोगों की भी कमी नहीं है जो कि दौलतमंद हैं और अपनी बेटी या बेटों की शादी पर इतना पैसा खर्च करते हैं कि उसका कम या ज़्यादा तौर पर असर गरीब लोगों पर जरूर पड़ता है क्योंकि यदि एक भाई पैसे वाला है और वह अपने बेटे या बेटी की शादी पर बहुत अधिक पैसा खर्च करता है और दूसरा भाई गरीब है तो फिर उसके सामने परेशानी खड़ी हो जाती है.
यह कोई किसी धर्म या किसी एक समाज की बात नहीं है बल्कि आज सभी जगह पर ऐसा हो रहा है कि शादियों पर इतनी फिजूलखर्ची होने लगी है कि उसे किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता और लोग यह शोर मचाते हैं कि महंगाई बहुत हो रही है लेकिन इस महंगाई के दौर में भी शादियों पर जिस तरह से फिजूल खर्ची करके अपनी शानो शौकत को बरकरार रखने की कोशिश की जाती है वह एक अफसोसनाक बात ही कही जाएगी. जिनके पास दौलत है वह तो फिजूलखर्ची खूब करते ही हैं लेकिन जिनके पास पैसा नहीं होता वह कर्ज लेकर अपनी बेटी की शादी करते हैं और जमाने के साथ चलने के चक्कर में वह इतना अपने ऊपर कर्ज कर लेते हैं की बेटी की शादी तो हो जाती है मगर उस एक दिन के लिए वह इतना खर्च करते हैं कि फिर तमाम जिंदगी उस पैसे को चुकाते चुकाते हो जाती है.
शादियों में जरूर से ज्यादा पैसा खर्च करने के चलन का यह दुष्परिणाम हुआ है कि बहुत सारी ऐसे गरीब लोग हैं कि जिनकी बेटियों की शादी की उम्र निकल चुकी है और उनके घर पर अब अच्छे रिश्ते नहीं आते क्योंकि हर कोई यह चाहता है कि जहां उसके बेटे की शादी हो तो उसको बहुत सारा दहेज में समान मिले. पैसे वाले घर में हर कोई शादी करना चाहता है लेकिन जो गरीब हैं वहां बहुत कम लोग ही रूख करते हैं. दहेज के खिलाफ बड़ी-बड़ी बातें करना एक अलग बात है और इस पर कायम रहने में बड़ा फर्क है यदि ऐसा नहीं होता तो फिर आज भी दहेज इस तरह से लोगों की परेशानी का कारण न बना हुआ होता.किसी शायर ने क्या खूब कहा है.
मुद्दत से तमन्नएँ सजी बैठी हैं दिल में, इस घर में बड़े लोगों का रिश्ता नहीं आता




