
दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति पर सियासी घमासान, अनुपमा रावत ने उठाए सवाल
अंकिता भंडारी प्रकरण का हवाला देकर कांग्रेस विधायक ने नियुक्ति पर जताई आपत्ति
हरिद्वार। उत्तराखंड के पूर्व भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। हरिद्वार ग्रामीण से कांग्रेस विधायक अनुपमा रावत ने दुष्यंत गौतम की नियुक्ति पर आपत्ति जताते हुए बहुचर्चित अंकिता भंडारी प्रकरण का जिक्र किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इस मामले को लेकर लगातार चर्चाएं और राजनीतिक सवाल उठ रहे हैं, तब ऐसे समय में दुष्यंत गौतम को संवैधानिक पद पर नियुक्त किया जाना कितना उचित है?
विधायक अनुपमा रावत के मुताबिक, अंकिता भंडारी प्रकरण में दुष्यंत गौतम का नाम चर्चा में आने के बाद उन्हें भाजपा के प्रदेश प्रभारी पद से हटाया गया था। उन्होंने मामले की सीबीआई जांच का हवाला देते हुए कहा कि इस प्रकरण में न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। हालांकि, दुष्यंत गौतम के खिलाफ लगाए जा रहे राजनीतिक आरोपों और उनकी कथित भूमिका को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के निष्कर्षों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को देखना आवश्यक है।
अनुपमा रावत ने अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के मुद्दे को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एक महिला होने के नाते इस मामले को लेकर उनकी संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं। उनके अनुसार, अंकिता प्रकरण ने उत्तराखंड में महिलाओं की सुरक्षा, न्याय व्यवस्था और प्रभावशाली लोगों की जवाबदेही जैसे गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
कांग्रेस विधायक ने दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति को इसी संदर्भ में उठाते हुए सवाल किया कि संवेदनशील और चर्चित मामले की जांच के दौरान इस तरह की नियुक्ति को लेकर उठने वाली शंकाओं का समाधान कैसे होगा। कांग्रेस का कहना है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग को राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय जांच की निष्पक्षता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाए जाने के बाद कांग्रेस के नेताओं की ओर से देहरादून सहित उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में विरोध के स्वर सामने आ रहे हैं। कांग्रेस नेता इस नियुक्ति को लेकर सवाल उठा रहे हैं और अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय की मांग को फिर से प्रमुखता से उठा रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने उत्तराखंड की राजनीति में अंकिता भंडारी प्रकरण को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
अंकिता भंडारी प्रकरण उत्तराखंड में लंबे समय से संवेदनशील और चर्चित मुद्दा रहा है। इस मामले में न्याय की मांग को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर आवाजें उठती रही हैं। दुष्यंत गौतम की राज्यपाल नियुक्ति के बाद इस प्रकरण का फिर से राजनीतिक विमर्श में प्रमुखता से उठना इसी सिलसिले का हिस्सा है।
हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम राजनीतिक चर्चाओं या आरोपों में आने मात्र से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। दुष्यंत गौतम की किसी भी कथित भूमिका के संबंध में निष्कर्ष जांच के निष्कर्षों और प्रमाणों के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए। फिलहाल, उनकी नियुक्ति को लेकर कांग्रेस के सवालों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।






