देहरादून

*नाएब शहर क़ाज़ी पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने ईद मिलादुन्नबी का जुलूस अमन-ओ-अमान और भाईचारे के साथ निकालने की अपील*

नाएब शहर क़ाज़ी पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने ईद मिलादुन्नबी का जुलूस अमन-ओ-अमान और भाईचारे के साथ निकालने की अपील

 *नाएब शहर क़ाज़ी पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने डीजे, तेज़ आवाज़ और हुड़दंग से परहेज़ की अपील की* 

देहरादून, 21 अगस्त। गांधी ग्राम स्थित ग़ोसिया जामा मस्जिद में जुमा की नमाज़ के बाद आगामी 26 अगस्त को ईद मिलादुन्नबी के जुलूस को कामयाब और पुरअमन बनाने के सिलसिले में एक अहम बैठक हुई। बैठक की सदारत पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी, नाएब शहर क़ाज़ी (अहले सुन्नत) एवं प्रदेश अध्यक्ष ऑल इंडिया मुस्लिम जमात ने की।

 

बैठक में पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने ईद मिलादुन्नबी के जुलूस को पूरी तरह अमन, भाईचारे और अनुशासन के साथ निकालने की अपील की। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान डीजे और तेज़ आवाज़ से परहेज़ किया जाए तथा अनावश्यक शोर-शराबे और हुड़दंग से पूरी तरह बचा जाए।

 

उन्होंने जुलूस के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने तथा रास्तों पर जाम की स्थिति पैदा न होने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान पुलिस और प्रशासन का पूरा सहयोग किया जाए, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

 

पीर सैयद अशरफ़ हुसैन क़ादरी ने मुसलमानों से यह भी अपील की कि ईद मिलादुन्नबी के जुलूस में छोटी और बड़ी लड़कियों को शामिल न किया जाए। उन्होंने कहा कि जुलूस में अनावश्यक भीड़ और शोर के बजाय सादगी, अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं का ख्याल रखा जाए।

 

उन्होंने डीजे की जगह छोटे साउंड सिस्टम के इस्तेमाल की अपील करते हुए कहा कि जुलूस का मकसद पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद ﷺ की पैदाइश की खुशी और उनके पैग़ाम-ए-मोहब्बत व भाईचारे को आम करना है।

 

उन्होंने लोगों से अपने घरों और दुकानों पर सिर्फ ईद मिलादुन्नबी से संबंधित झंडे लगाने की अपील की और कहा कि ऐसे झंडे न लगाए जाएं जो किसी दूसरे देश, विशेष रूप से पाकिस्तानी झंडे से मिलते-जुलते नज़र आएं।

 

वहीं गांधी ग्राम ग़ोसिया जामा मस्जिद के ख़तीब व इमाम मौलाना मोहम्मद आज़म साहब ने मस्जिदों, घरों और जुलूस के रास्तों को रोशनी से सजाने के साथ-साथ साफ-सफाई का ख़ास ख्याल रखने की अपील की।

 

बैठक में राशिद खान, इम्तियाज़ अहमद, निसार अहमद, अमजद अली, शमीम, रियासत, डॉ. शबाब हुसैन, नूर आलम, शाहिद सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।

 

बैठक के अंत में ईद मिलादुन्नबी के जुलूस को शांतिपूर्ण, अनुशासित और भाईचारे की मिसाल बनाने का संकल्प लिया गया।

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