यूपी में कायम रहेगी दोस्ती या टूटेगा सपा कांग्रेस का गठबंधन ?
(शिब्ली रामपुरी)
यूपी में विधानसभा चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं रह गया है तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सीट शेयरिंग के फार्मूले को लेकर भी सियासत तेज हो गई है. अखिलेश यादव अभी हाल ही में रायबरेली पहुंचे जो कांग्रेस का सियासी गढ़ माना जाता है तो वहीं कांग्रेस के नेताओं ने भी अब अपनी राजनीतिक जमीन उत्तर प्रदेश में मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है दूसरी तरफ अब सीट शेयरिंग का जो फार्मूला है वह भी जल्दी ही तय होने जा रहा है हालांकि अब सीट शेयरिंग का फार्मूला क्या रहता है इसको लेकर कुछ भी कहना फिलहाल काफी कठिन नजर आता है और यही वह वजह है कि जहां पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के दोस्ताना रिश्तों में दरार भी पड़ सकती है?
समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मजबूत है और इसमें कोई दो राय नहीं है कि यहां विपक्ष के सबसे बड़े खिलाड़ी अखिलेश यादव हैं तो कांग्रेस पार्टी भी यहां पर काफी वक्त से मेहनत कर रही है और जिस तरीके से राहुल गांधी अब जनहित से जुड़े बहुत सारे मुद्दों को उठा रहे हैं उसका प्रभाव कहीं ना कहीं उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है और इसका पता इसी से चलता है कि पूर्व सांसद अमीर आलम और नवाजिश खान से लेकर आसिम वकार तक ने कांग्रेस का अभी हाल ही में दामन थामा है तो कुछ और नेताओं के भी पाला बदलने की खबर है हालांकि समाजवादी पार्टी पर इससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में मजबूत विपक्ष है और अखिलेश यादव काफी मेहनत भी पार्टी के लिए कर रहे हैं.
जहां तक सीट शेयरिंग का फार्मूला है तो माना जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में 200 सीटों पर चुनावी मैदान में अपने प्रत्याशी इस गठबंधन के तहत उतरना चाहती है लेकिन क्या अखिलेश यादव 200 सीट देने के लिए तैयार होंगे?
अभी हाल ही में लखनऊ में आयोजित एक कांफ्रेंस के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से एक सवाल पूछा गया था सवाल तो गठबंधन को लेकर था कि क्या आप एमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी से गठबंधन करेंगे तो इस पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का जवाब था कि हमारा जो गठबंधन पूर्व से है वही कायम रहेगा जाहिर सी बात है कि अखिलेश यादव का जहां-जहां जिससे गठबंधन पूर्व में रहा है वह उसी को आगे भी बढ़ाने की बात कर रहे हैं लेकिन सीट शेयरिंग का जो फार्मूला उनका कांग्रेस के साथ है अगर उस पर बात नहीं बनी तो यह दोस्ती सपा और कांग्रेस की टूट भी सकती है. जहां तक इन दोनों पार्टियों की बात है तो यह कहना गलत नहीं होगा कि कांग्रेस पार्टी उत्तर प्रदेश में पहले से अधिक मजबूत तो हुई है लेकिन आज भी उत्तर प्रदेश में कुछ चंद जगह को छोड़कर कांग्रेस पार्टी इतनी मजबूत नहीं है और समाजवादी पार्टी के बगैर कांग्रेस पार्टी की राजनीतिक नैया पार लगना उत्तर प्रदेश में काफी कठिन है तो जाहिर है ऐसे में अखिलेश यादव बहुत सोच समझ कर सीट शेयरिंग के फार्मूले पर कांग्रेस के साथ बातचीत करेंगे. लोकसभा चुनाव 2024 में वैसे कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का मजबूत गठबंधन काफी बेहतर परिणाम दे चुका है और अखिलेश यादव इस बात को भी बखूबी समझते हैं कि कांग्रेस के साथ के बगैर समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश में काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है क्योंकि अब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस एकजुटता की बात कर रहे हैं लेकिन गठबंधन समाप्त होने के बाद दोनों एक दूसरे के मुकाबले चुनावी मैदान में उतरेंगे और जाहिर सी बात है इसका बहुत बड़ा नुकसान समाजवादी पार्टी को भी होगा. फिलहाल तो सहारनपुर से कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद से लेकर कैराना से सपा सांसद इक़रा हसन और कांग्रेस के नेता असीम वक़ार के बयानों ने गठबंधन की पॉलिटिक्स को और तेज़ कर दिया है.

