देहरादून

*भाजपा के भीतर बढ़ी खींचतान, मधु चौहान के धरने से गरमाई उत्तराखंड की सियासत* 

भाजपा के भीतर बढ़ी खींचतान, मधु चौहान के धरने से गरमाई उत्तराखंड की सियासत

 

रिपोर्टर : शाइना परवीन

 

देहरादून: मधु चौहान ने लगाया कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और कांग्रेस समर्थित लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप, मंत्री बोले—आरोप साबित हुए तो राजनीति छोड़ दूंगा

 

उत्तराखंड की सियासत में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के ही कार्यकर्ताओं ने अपनी सरकार के कैबिनेट मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विकासनगर से भाजपा विधायक मुन्ना सिंह चौहान की धर्मपत्नी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष मधु चौहान के नेतृत्व में चकराता क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं ने समाज कल्याण मंत्री खजान दास के सरकारी आवास पर सांकेतिक धरना दिया।

 

प्रदर्शनकारियों ने चकराता क्षेत्र में समाज कल्याण विभाग की योजनाओं के आवंटन में पार्टी कार्यकर्ताओं की कथित अनदेखी और कांग्रेस से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए। इस दौरान कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए गए, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

 

मामला सामने आने के बाद मंत्री खजान दास ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ एक पैसे के कमीशन या भ्रष्टाचार का आरोप भी साबित हो जाता है तो वह राजनीति छोड़ने के साथ ही आत्महत्या तक करने की बात कह चुके हैं।

 

बताया जा रहा है कि विवाद समाज कल्याण विभाग से जुड़ी अनुसूचित जाति उप योजना यानी SCSP और जनजाति उप योजना यानी TSP की योजनाओं की सूची को लेकर सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक 11 सितंबर को जारी सूची में चकराता क्षेत्र के कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा दिए गए प्रस्तावों को अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिलने को लेकर नाराजगी सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने सूची की दोबारा समीक्षा कराने की मांग की।

 

मधु चौहान का आरोप है कि चकराता क्षेत्र में भाजपा का स्थानीय विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष या ब्लॉक प्रमुख नहीं है। ऐसे में पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से संगठन को मजबूत करने का काम किया है, लेकिन सरकारी योजनाओं और कार्यों के आवंटन में उन्हीं कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है।

 

प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस से जुड़े लोगों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में कार्यकर्ताओं की ओर से कमीशन के आरोप भी सामने आए हैं। हालांकि, इस तरह के आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष से पुष्टि होना अभी बाकी है।

 

आरोपों पर समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि सरकार की योजनाओं में किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि आरोप साबित होते हैं तो वह न केवल अपना पद छोड़ देंगे बल्कि राजनीति से भी संन्यास ले लेंगे।

 

वहीं, रिपोर्टों के मुताबिक मंत्री की ओर से संबंधित सूची की समीक्षा की बात भी कही गई थी।

 

धरने के बाद भाजपा के भीतर मामला सुलझाने की कोशिशों की भी चर्चा है। मधु चौहान की ओर से इसे पार्टी परिवार के भीतर का मामला बताते हुए बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद जताई गई है।

 

हालांकि विवाद का असर सोमवार को भी दिखाई दिया, जब चकराता क्षेत्र के करीब 60 कार्यकर्ता भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता लेने पहुंचे, लेकिन मंत्री खजान दास के विरोध के बाद जॉइनिंग कार्यक्रम नहीं हो सका और कार्यकर्ताओं को वापस लौटना पड़ा।

 

मामला भाजपा सरकार के मंत्री से जुड़ा होने के कारण कांग्रेस ने भी इसे हाथों-हाथ लिया है। कांग्रेस नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को भाजपा की अंदरूनी खींचतान बताते हुए कहा कि पार्टी में दूसरे दलों से नेताओं और कार्यकर्ताओं को शामिल किए जाने के कारण पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।

 

कांग्रेस का कहना है कि चकराता में सामने आया विरोध इसी अंदरूनी असंतोष की एक झलक है और आने वाले समय में ऐसे और मामले सामने आ सकते हैं। कांग्रेस के इन राजनीतिक आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

 

वहीं भाजपा की ओर से कहा गया है कि सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम कर रही है और सरकारी योजनाएं किसी एक पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए नहीं बल्कि पात्र लोगों और क्षेत्र के विकास के लिए होती हैं। भाजपा नेताओं के अनुसार, कभी-कभी कार्यकर्ताओं को अपेक्षित काम नहीं मिलने से नाराजगी पैदा हो जाती है, जिसे बातचीत के माध्यम से दूर किया जाएगा।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तराखंड भाजपा के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पार्टी के ही नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मंत्री पर योजनाओं के आवंटन में भेदभाव और कमीशनखोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं मंत्री ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए आरोप साबित होने पर राजनीति छोड़ने तक की बात कही है।

 

ऐसे में असली सवाल यही है कि क्या इन आरोपों की कोई स्वतंत्र जांच होगी? क्या विवादित योजनाओं की सूची की दोबारा समीक्षा होगी? और क्या भाजपा संगठन इस मामले में कोई औपचारिक कार्रवाई या स्पष्टीकरण जारी करेगा?

 

फिलहाल चकराता की योजनाओं को लेकर शुरू हुआ यह विवाद भाजपा के भीतर संगठन और सरकार के बीच बढ़ते असंतोष की चर्चा को जरूर हवा दे रहा है। आरोपों की वास्तविकता जांच या आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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