सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, आदेशों की वैधता पर उठे सवाल
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को ध्वस्त किए जाने का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। मस्जिद के ध्वस्तीकरण के खिलाफ दायर याचिका में सिटी मजिस्ट्रेट और जिला जज के आदेशों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया गया है कि दोनों अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र और कानूनी अधिकार से बाहर जाकर मस्जिद को गिराने के आदेश पारित किए।
याचिका में जिला मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रशासन तथा मस्जिद के मौलवी और मैनेजर अब्दुल हामिद को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष मस्जिद के ध्वस्तीकरण की पूरी प्रक्रिया और उससे जुड़े प्रशासनिक एवं न्यायिक आदेशों की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।
मामले के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर में करीब 315 वर्ग मीटर क्षेत्रफल के प्लॉट पर मस्जिद बनी हुई थी। सिटी मजिस्ट्रेट ने उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जेदारों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 16 जुलाई को मस्जिद को गिराने का आदेश जारी किया था।
बताया गया है कि आदेश में मस्जिद के प्रबंधन पर 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। प्रशासन की ओर से मस्जिद को सार्वजनिक परिसर में अनधिकृत कब्जे से जुड़ा मामला माना गया।
सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला अदालत में अपील दाखिल की गई थी। हालांकि, जिला जज ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी। इसके बाद मस्जिद के ध्वस्तीकरण का रास्ता साफ हो गया।
अपील खारिज होने के कुछ ही दिन बाद प्रशासन ने 5 सितंबर की सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद को ध्वस्त कर दिया। ध्वस्तीकरण के दौरान इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी, ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।
अब हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में मुख्य रूप से इस बात को चुनौती दी गई है कि क्या सिटी मजिस्ट्रेट और जिला जज को इस प्रकार का आदेश पारित करने का अधिकार प्राप्त था। याचिका में दावा किया गया है कि संबंधित अधिकारियों ने बिना अधिकार क्षेत्र अथवा पर्याप्त कानूनी अधिकार के मस्जिद गिराने के आदेश दिए।
याचिका में अदालत से मामले की न्यायिक समीक्षा किए जाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और उससे पहले पारित आदेशों को कानून की कसौटी पर परखे जाने की गुहार लगाई है।
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद से यह मामला स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट की कार्यवाही पर टिकी हैं। याचिका पर अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई और पारित आदेशों को लेकर न्यायालय का क्या रुख रहता है।

