राजनीति राष्ट्रीय

भाजपा के सामने क्यों कमज़ोर पड़ रहा है विपक्ष?

विपक्ष की कमजोरी या भाजपा की रणनीतिक मजबूती?

(शिब्ली रामपुरी)

शिब्ली रामपुरी
शिब्ली रामपुरी

भारतीय जनता पार्टी के सामने आज विपक्ष की जो हालत है वह किसी से छुपी हुई नहीं है विपक्षी पार्टियां इस बात को लेकर बहुत चिंतित हैं कि आखिर वह भारतीय जनता पार्टी से किसी भी चुनाव में मजबूती के साथ क्यों मुकाबला नहीं कर पा रही हैं इसके अलावा विपक्षी पार्टियों में कई ऐसी पार्टियां हैं कि जिनके अंदर ही अंदरूनी घमासान मचा हुआ है और उनके अपने ही पुराने वफादार नेता उनको छोड़कर जा रहे हैं और कई छोड़ने की तैयारी में है.

भाजपा के सामने आखिर विपक्ष आज इतना कमजोर क्यों पड़ चुका है इस बात पर यदि गंभीरता से ध्यान दिया जाए तो इस बात के कई कारण नजर आते हैं सबसे बड़ी बात तो यह भी माननी पड़ेगी कि भारतीय जनता पार्टी ने जो कहा वह 2014 में सत्ता में आने के बाद से उसे पूरा करने का तकरीबन प्रयास ही नहीं किया बल्कि कई वायदे तो भारतीय जनता पार्टी ने पूरे कर दिए हैं. वहीं दूसरी तरफ जो विपक्षी पार्टियां हैं उनका हाल यह है कि वह तो अपने वोट बैंक का ही भरोसा जीतने में अभी तक पूरी तरह से सफल होती दिखाई नहीं दे रही हैं और जो उनका हमेशा से मजबूत जनाधार रहा है वह भी उनसे अब खिसकने लगा है.

भाजपा की जो अपनी विचारधारा है उससे इत्तेफाक रखना ना रखना अलग बात है लेकिन यह हकीकत है कि भाजपा अपनी विचारधारा से आज भी नहीं हटी है और वह अपनी विचारधारा पर मजबूती से कायम है जबकि दूसरी जो पार्टियां हैं उनकी विचारधारा तकरीबन हिलोरे मारती रहती है. विपक्षी दल कई बार अपनी विचारधारा से इधर-उधर होते नजर आते हैं. कई विपक्षी दल तो जिस समाज के वोट लेकर मजबूती हासिल करते रहे हैं उस समाज के नेताओं को ही ज्यादा अहमियत नहीं देते तो ऐसे में कई विपक्षी पार्टियों का भारतीय जनता पार्टी के सामने कमजोर पड़ना तो लाजमी है.

भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जो गठबंधन लोकसभा चुनाव में बना उसके बाद वह किस तरह बिखरता नजर आया यह सभी ने देखा और आज भी वह गठबंधन मजबूत कहां है वह तो कई जगह पर बिखरता हुआ दिखाई देता है उसके अपने नेता ही एक दूसरे पर खूब बयानबाज़ी करते हैं. उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के दौरान सपा और कांग्रेस ने एकजुट होकर मजबूती से चुनाव लड़ा और नतीजे काफी बेहतर रहे थे लेकिन अब आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच क्या हो रहा है यह सबके सामने है. कांग्रेस के कई सीनियर नेताओं की ख्वाहिश है कि कांग्रेस अपने बलबूते सभी सीटों पर चुनाव लड़े और सपा से उसका गठबंधन न हो तो वहीं समाजवादी पार्टी के भी कुछ नेताओं की ऐसी ही मर्जी नजर आती है वहीं समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का जो शीर्ष नेतृत्व है वह मजबूती की बात करता है कि गठबंधन मजबूत है तो ऐसे में यह जो राजनीति हो रही है यह किसी भी तरह से सही नहीं कही जा सकती और यदि ऐसे ही चलता रहा तो आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में विपक्षी पार्टियों को चुनावी मैदान में भारतीय जनता पार्टी का राजनीतिक मुकाबला करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. सबसे पहले विपक्षी पार्टियों को एकजुटता पैदा करनी होगी. जितने भी विपक्षी दल हैं उनको अपने भीतर झांकना होगा और यह देखना होगा कि पार्टी के जो नेता हैं और जो कार्यकर्ता हैं क्या उनको पार्टी में पूरा मान सम्मान मिल रहा है कहीं उनमें कोई नाराजगी तो नहीं है क्योंकि अक्सर अब विपक्षी दलों पर यह नाराजगी भारी पड़ने लगी है. पार्टी में एकजुटता बनाए रखना भी विपक्षी दलों के लिए आज किसी चुनौती से कम नहीं है.

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