
बेटी की शादी से पहले पत्रकार की हत्या की घटना से परिवार में पसरा मातम
(शिब्ली रामपुरी)
उत्तर प्रदेश के हापुड़ में विज्ञापन के नाम पर जिस तरीके से एक पत्रकार की हत्या कर दी गई वह पूरी तरह से अफ़सोसनाक है. पत्रकारों के साथ आए दिन जिस तरीके से कई तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं वह इस बात को साबित करती हैं कि आज तक पत्रकारों की सुरक्षा के लिए वह कानून नहीं बनाए गए कि जिनकी पत्रकारों को काफी जरूरत है. यहां यह कहना भी गलत नहीं होगा कि केंद्र में जब कांग्रेस की सरकार थी तब भी पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर कई तरीके की बातें की जाती थी कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कानून बनाए जाएंगे लेकिन उस दौरान भी ऐसा कुछ नहीं हो सका और मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है तब भी पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ऐसे कानून नहीं बनाए जा रहे हैं कि जिनकी आज सबसे ज्यादा पत्रकारिता जगत को आवश्यकता है.
यह एक कड़वी सच्चाई है जिसे किसी भी तरह से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि दबंग किस्म के लोग हमेशा से पत्रकारों की आवाज को दबाने की कोशिश में लगे रहते हैं और मौजूदा समय में भी हम देखते हैं कि किस तरह से कुछ दबंग लोग जगह-जगह पर अपने हथकंडो से निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले लोगों को परेशान करते हैं उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जाता है कई जगह पर उनके साथ बदसलूकी और मारपीट होती है तो कुछ मामले हापुड़ जैसी घटना से भी सामने आते हैं और बताते हैं कि पत्रकारिता जगत भी आज काफी दुर्दशा का शिकार है और इसके लिए सरकार को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है.
पत्रकारों के जगह-जगह पर संगठन बने हुए हैं और वह संगठन अपने-अपने तरीके से पत्रकारों के हित के लिए आवाज भी उठाते हैं और यदि किसी पत्रकार के साथ कोई हादसा हो जाता है और उसकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है तो वह वहां पर भी आपसी एकता और एकजुटता के साथ उस पत्रकार की सहायता करते हैं लेकिन ऐसे मामलों में भी सरकार का कर्तव्य है कि वह पत्रकारों के लिए ऐसा प्रावधान करे कि ताकि पत्रकारों की ना सिर्फ़ सुरक्षा हो सके बल्कि आर्थिक रूप से भी उनकी मदद की जा सके.
हापुड़ में पत्रकार नसीम खान के साथ पहले बदसलूकी की गई उनको फर्जी पत्रकार कहा गया और आरोप है कि उनके साथ आटा मिल में कई लोगों ने मिलकर मारपीट की और उनकी इतनी पिटाई की गई कि कुछ देर बाद ही उनका निधन हो गया. पत्रकार नसीम खान की बेटी की अगले महीने नवंबर में शादी है और शादी से पहले ही उनके घर में मातम पसर गया है. पूरे परिवार का रो-रो कर बुरा हाल है. इस मामले के दोषियों को सख्त सजा दी जानी चाहिए और उन पर रासुका के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए इसके अलावा उनके परिवार को एक करोड रुपए का मुआवजा भी दिया जाए. जहां तक इस मामले में कार्रवाई की बात है तो पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया है और हमें भरोसा है कि पुलिस इस मामले में निष्पक्ष तरीके से और काबिले तारीफ तरीके से जांच पड़ताल कर दोषियों को सख्त कानूनी सजा दिलवाने का प्रयास करेगी.





