
उत्तराखंड में गुटखा और तंबाकू-निकोटीन युक्त पान मसाले पर एक साल की रोक
*दुकानों से गोदामों तक होगी जांच, प्रतिबंधित गुटखा कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें*
देहरादून। उत्तराखंड में गुटखा और तंबाकू-निकोटीन युक्त पान मसाले के कारोबार को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के मद्देनजर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए रोक लगाने का आदेश जारी किया है। 13 अक्टूबर 2026 को जारी इस आदेश के बाद संबंधित कारोबारियों को नियमों का पालन करना होगा। प्रतिबंधित उत्पादों का कारोबार जारी रखने पर कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त विनय शंकर पांडेय की ओर से जारी आदेश का दायरा केवल खुदरा दुकानों तक सीमित नहीं है। इसके अंतर्गत प्रतिबंधित श्रेणी में आने वाले उत्पादों के निर्माण, थोक कारोबार, गोदामों में भंडारण और वितरण व्यवस्था पर भी निगरानी रखी जा सकती है। इसका उद्देश्य प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
प्रतिबंध से बचने के लिए तंबाकू और पान मसाले को अलग-अलग पैकेटों में बेचने की कोशिशों को लेकर भी आदेश में प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। ऐसे उत्पाद, जिनमें तंबाकू या निकोटीन मौजूद है और जो प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं, उनके मामले में केवल पैकिंग या बिक्री का तरीका बदलने से प्रतिबंध से छूट नहीं मिलेगी।
हालांकि, किसी उत्पाद पर कार्रवाई करने से पहले यह सुनिश्चित करना आवश्यक होगा कि वह जारी आदेश के दायरे में आता है या नहीं। संबंधित उत्पाद की संरचना, उसमें मौजूद सामग्री और लागू कानूनी प्रावधानों के आधार पर कार्रवाई तय की जाएगी।
आदेश जारी होने के बाद जिला प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अधिकारियों को बाजार, गोदामों और वितरण केंद्रों पर निगरानी रखते हुए प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता की जांच करनी होगी। नियमों का उल्लंघन सामने आने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ लागू कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
मामले की प्रकृति और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उत्पाद जब्त करने, जुर्माना लगाने, प्रतिष्ठान सील करने या प्राथमिकी दर्ज कराने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, कार्रवाई का स्वरूप संबंधित मामले और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होगा।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने अपने आदेश में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विक्रय प्रतिषेध और निर्बंधन) विनियम, 2011 का उल्लेख किया है। आदेश में विनियम 2.3.4 और अधिनियम की धारा 30(2)(क) के तहत प्रतिबंध लगाने की शक्ति का हवाला दिया गया है।
तंबाकू और निकोटीन का सेवन मुंह के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। ऐसे में प्रतिबंधित श्रेणी के उत्पादों की बिक्री और वितरण पर नियंत्रण को जनस्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आदेश की प्रतियां स्वास्थ्य विभाग, सभी जिलाधिकारियों, मुख्य चिकित्साधिकारियों और संबंधित खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को भेजी गई हैं। गढ़वाल और कुमाऊं मंडलों के अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। प्रतिबंध आदेश जारी होने की तारीख से एक वर्ष तक प्रभावी रहने के लिए जारी किया गया है।
अब इस आदेश की वास्तविक सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। बाजारों में प्रतिबंधित उत्पादों की उपलब्धता रोकने, गोदामों की जांच करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी संबंधित विभागों पर होगी।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रतिबंधित श्रेणी के गुटखा और तंबाकू-निकोटीन युक्त पान मसाले का कारोबार करने वालों को नियमों का पालन करना होगा। आदेश का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों को कानून के मुताबिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।






